POSH जाँच की समय-सीमा दिखाती टाइमलाइन: शिकायत, जाँच, रिपोर्ट, कार्रवाई और अपील

POSH जाँच में कितना समय लगता है: चरण दर चरण

Quick answer: POSH Act, 2013 के अनुसार जाँच 90 दिन में पूरी होनी चाहिए (धारा 11(4))। फिर रिपोर्ट 10 दिन में नियोक्ता को (धारा 13(1)), नियोक्ता की कार्रवाई 60 दिन में (धारा 13(4)), और अपील सिफ़ारिशों से 90 दिन में (धारा 18(2))। शिकायत घटना (या आख़िरी घटना) से 3 महीने में दी जाती है, जिसे दर्ज कारणों से अधिकतम 3 महीने और बढ़ाया जा सकता है (धारा 9(1))।

शिकायत आते ही Internal Committee का पहला सवाल होता है: किस काम की आख़िरी तारीख़ कब है? POSH FAQ की सूची से आगे, यहाँ एक उदाहरण के साथ दिन-दर-दिन टाइमलाइन है।

POSH जाँच की हर समय-सीमा क्या है?

“धारा” का अर्थ POSH Act, 2013 (Act No. 14 of 2013) और “Rule” का अर्थ POSH Rules, 2013 है।

चरणसमय-सीमाधारा / नियम
लिखित शिकायत देनाघटना से 3 महीने में; घटनाओं की शृंखला में आख़िरी घटना से 3 महीने मेंधारा 9(1)
शिकायत की समय-सीमा बढ़ानाअधिकतम 3 महीने और, लिखित दर्ज कारणों के साथधारा 9(1), दूसरा proviso
शिकायत की कॉपी प्रतिवादी को भेजना7 working days मेंRule 7(2)
प्रतिवादी का जवाब, दस्तावेज़ और गवाहों की सूची10 working days से अधिक नहींRule 7(3)
जाँच पूरी करना90 दिन मेंधारा 11(4)
ex parte या जाँच समाप्त करने से पहले नोटिस15 दिन पहले, लिखित मेंRule 7(5)
रिपोर्ट नियोक्ता या District Officer कोजाँच पूरी होने से 10 दिन मेंधारा 13(1)
नियोक्ता की कार्रवाईसिफ़ारिश मिलने से 60 दिन मेंधारा 13(4)
अपीलसिफ़ारिशों से 90 दिन मेंधारा 18(2)

Rule 7(2) और 7(3) की समय-सीमाएँ “working days” में हैं; Rule 7(5) का 15 दिन का नोटिस और Act की समय-सीमाएँ सामान्य दिनों या महीनों में लिखी हैं। Rule 7 के कदम वहाँ लागू होते हैं जहाँ प्रतिवादी पर service rules लागू नहीं होते (धारा 11(1))।

शिकायत आने से जाँच शुरू होने तक क्या होता है?

धारा 9(1) के अनुसार पीड़ित महिला लिखित शिकायत Internal Committee को देती है, और जहाँ Internal Committee नहीं बनी है वहाँ Local Committee को। अगर वह लिख नहीं सकतीं, तो कमेटी के सदस्य लिखने में उचित मदद देंगे।

जहाँ प्रतिवादी पर कोई service rules लागू नहीं होते, वहाँ जाँच का तरीका Rules से तय होता है (धारा 11(1))। Rule 7 के शुरुआती कदम ये हैं:

  • शिकायत मिलने पर कमेटी उसकी एक कॉपी 7 working days में प्रतिवादी को भेजती है (Rule 7(2))।
  • प्रतिवादी 10 working days के भीतर अपना जवाब, दस्तावेज़ों की सूची और गवाहों के नाम-पते देता है (Rule 7(3))।

इसी शुरुआती दौर में conciliation का विकल्प आता है। धारा 10(1) के अनुसार कमेटी जाँच शुरू करने से पहले, और केवल पीड़ित महिला के अनुरोध पर, समझौते के कदम उठा सकती है। पैसे का लेन-देन समझौते का आधार नहीं बन सकता। समझौता होने पर कमेटी उसे दर्ज करके नियोक्ता या District Officer को भेजती है (धारा 10(2)), दोनों पक्षों को उसकी कॉपी देती है (धारा 10(3)), और फिर आगे कोई जाँच नहीं होती (धारा 10(4))।

90 दिन की जाँच के भीतर कौन-से कदम आते हैं?

धारा 11(4) के 90 दिनों में ये काम होते हैं:

  1. सुनवाई: जाँच प्राकृतिक न्याय के सिद्धांतों पर चलती है (Rule 7(4))। जाँच के दौरान Presiding Officer सहित कम से कम तीन सदस्य मौजूद रहने चाहिए (Rule 7(7))।
  2. गवाह और दस्तावेज़: कमेटी के पास किसी व्यक्ति को बुलाने, शपथ पर पूछताछ करने और दस्तावेज़ मँगवाने के लिए civil court जैसी शक्तियाँ हैं (धारा 11(3))।
  3. वकील नहीं: कार्यवाही के किसी भी चरण में पक्ष अपनी ओर से legal practitioner नहीं ला सकते (Rule 7(6))।
  4. findings पर representation: जब दोनों पक्ष कर्मचारी हों, तो दोनों को सुनवाई का अवसर और findings की कॉपी मिलती है, ताकि वे कमेटी के सामने अपनी बात रख सकें (धारा 11(1), दूसरा proviso)।

जाँच के दौरान पीड़ित महिला के लिखित अनुरोध पर कमेटी नियोक्ता से सिफ़ारिश कर सकती है (धारा 12(1)) कि महिला या प्रतिवादी का दूसरे कार्यस्थल पर transfer हो, महिला को अधिकतम 3 महीने की छुट्टी मिले, या कोई अन्य निर्धारित राहत दी जाए। यह छुट्टी उनकी सामान्य छुट्टियों के अतिरिक्त होती है (धारा 12(2))। नियोक्ता सिफ़ारिश लागू करके उसकी रिपोर्ट कमेटी को भेजता है (धारा 12(3))।

एक उदाहरण: शिकायत से अपील तक दिन-दर-दिन टाइमलाइन कैसी दिखती है?

मान लीजिए किसी संस्था की Internal Committee को दिन 0 पर लिखित शिकायत मिलती है। धारा 11(4) यह नहीं बताती कि 90 दिन किस तारीख़ से गिने जाएँ, इसलिए सावधानी के लिए यहाँ उन्हें शिकायत मिलने से गिना गया है। यह कानूनी व्याख्या नहीं, योजना का सुरक्षित तरीका है। working days को पाँच दिन के कार्य-सप्ताह से लगभग कैलेंडर दिनों में बदला गया है (दिन 0 को सोमवार और बीच में कोई छुट्टी न मानकर); आपकी असल तारीख़ें छुट्टियों के हिसाब से बदलेंगी।

  • दिन 0: शिकायत मिली; जाँचें कि यह घटना (या आख़िरी घटना) से 3 महीने के भीतर है, या देर होने पर कमेटी ने दर्ज कारणों से समय-सीमा बढ़ाई है (धारा 9(1))।
  • दिन 0 से 9 के आसपास: 7 working days के भीतर शिकायत की कॉपी प्रतिवादी तक पहुँचे (Rule 7(2))।
  • लगभग दिन 23 तक: प्रतिवादी का जवाब आए, जो कॉपी मिलने के 10 working days से अधिक नहीं (Rule 7(3))।
  • दिन 25 से 80: सुनवाइयाँ, बयान, दस्तावेज़; ज़रूरत हो तो interim relief (धारा 12)।
  • दिन 80 से 90 के बीच: दोनों पक्ष कर्मचारी हों तो findings की कॉपी और representation का अवसर (धारा 11(1))। जाँच दिन 90 तक पूरी (धारा 11(4))।
  • दिन 100 तक: रिपोर्ट नियोक्ता को, जो दोनों पक्षों को भी उपलब्ध कराई जाए (धारा 13(1))।
  • दिन 160 तक: अगर रिपोर्ट दिन 100 को मिली, तो नियोक्ता की कार्रवाई (धारा 13(4))।
  • दिन 190 तक: अगर सिफ़ारिशें दिन 100 की तारीख़ की हैं, तो उनके विरुद्ध अपील की आख़िरी तारीख़ (धारा 18(2)); रिपोर्ट पहले की तारीख़ की हो, तो यह तारीख़ भी उतनी ही पहले आएगी।

अपील के 90 दिन सिफ़ारिशों से गिने जाते हैं। जहाँ service rules नहीं हैं, वहाँ अपील Industrial Employment (Standing Orders) Act, 1946 की धारा 2(a) के तहत notified appellate authority के पास होती है (Rule 11)। अपील केवल सिफ़ारिशों के विरुद्ध ही नहीं, उन्हें लागू न किए जाने के विरुद्ध भी हो सकती है (धारा 18(1))।

क्या कोई चीज़ समय-सीमा को रोकती या बढ़ाती है?

Act के शब्दों के आधार पर:

  • शिकायत की समय-सीमा का विस्तार (धारा 9(1)): कमेटी लिखित कारण दर्ज करके शिकायत देने की समय-सीमा अधिकतम 3 महीने बढ़ा सकती है, अगर परिस्थितियों ने महिला को समय पर शिकायत करने से रोका हो। इससे 90 दिन की जाँच-सीमा नहीं बढ़ती।
  • Conciliation (धारा 10): यह जाँच शुरू होने से पहले का कदम है। समझौता हो जाए तो जाँच होती ही नहीं (धारा 10(4))। अगर बाद में महिला कमेटी को बताएँ कि प्रतिवादी ने समझौते की शर्तें पूरी नहीं कीं, तो कमेटी जाँच शुरू करती है (धारा 11(1), पहला proviso)। Act में conciliation के दौरान घड़ी “रुकने” का कोई अलग प्रावधान नहीं लिखा है।
  • Interim relief (धारा 12): यह जाँच के दौरान मिलने वाली राहत है। Act में इससे 90 दिन बढ़ने का कोई प्रावधान नहीं है।

Frequently asked questions

क्या POSH जाँच 90 दिन में पूरी करना ज़रूरी है?

हाँ। POSH Act, 2013 की धारा 11(4) कहती है कि जाँच 90 दिन के भीतर पूरी होगी। इसके बाद कमेटी को जाँच पूरी होने के 10 दिन के भीतर अपनी रिपोर्ट नियोक्ता या District Officer को देनी होती है (धारा 13(1))।

प्रतिवादी को शिकायत की कॉपी कब मिलती है?

जहाँ service rules लागू नहीं हैं, वहाँ Rule 7(2) के अनुसार कमेटी 7 working days के भीतर शिकायत की एक कॉपी प्रतिवादी को भेजती है। प्रतिवादी को 10 working days के भीतर अपना जवाब, दस्तावेज़ और गवाहों की सूची देनी होती है (Rule 7(3))।

क्या conciliation के बाद भी जाँच हो सकती है?

समझौता होने पर आगे जाँच नहीं होती (धारा 10(4))। लेकिन अगर पीड़ित महिला बताएँ कि प्रतिवादी ने समझौते की कोई शर्त पूरी नहीं की, तो कमेटी जाँच शुरू करती है (धारा 11(1))। पैसा समझौते का आधार नहीं बन सकता (धारा 10(1))।

अगर कोई पक्ष सुनवाई में न आए तो क्या होता है?

जहाँ service rules लागू नहीं हैं, वहाँ Rule 7(5) के अनुसार अगर कोई पक्ष बिना पर्याप्त कारण लगातार तीन सुनवाइयों में नहीं आता, तो कमेटी जाँच समाप्त कर सकती है या ex parte निर्णय दे सकती है। इससे पहले उस पक्ष को 15 दिन पहले लिखित नोटिस देना ज़रूरी है।

क्या जाँच में कोई पक्ष वकील ला सकता है?

जहाँ service rules लागू नहीं हैं, वहाँ नहीं। Rule 7(6) के अनुसार कार्यवाही के किसी भी चरण में पक्ष अपनी ओर से legal practitioner नहीं ला सकते। जाँच के दौरान Presiding Officer सहित कम से कम तीन सदस्य मौजूद रहने चाहिए (Rule 7(7))।

अपील की 90 दिन की अवधि कब से गिनी जाती है?

धारा 18(2) के अनुसार अपील सिफ़ारिशों से 90 दिन के भीतर करनी होती है, नियोक्ता की कार्रवाई से नहीं। इसलिए नियोक्ता के 60 दिन (धारा 13(4)) और अपील की अवधि एक साथ चलती हैं।

क्या आपकी Internal Committee इन समय-सीमाओं के लिए तैयार है?

मनस् Center में Dr. Priya Dubey Sharma, Founder & Consulting Psychologist (संस्थापक एवं कंसल्टिंग साइकोलॉजिस्ट), आपकी Internal Committee में External Member के रूप में जुड़ती हैं। हर केस पर 90 दिन की जाँच-सीमा और रिपोर्ट व कार्रवाई की तारीख़ें committee portal में ट्रैक होती हैं। अपनी कमेटी की स्थिति जानने के लिए 2 मिनट का मुफ़्त POSH check करें, हमारी POSH सेवा देखें, या POSH FAQ में बाकी सवालों के जवाब पढ़ें।

Sources

Written by
Manas Editorial Team

Plain-language guides to POSH compliance for Indian employers, based on the Act, the Rules and court rulings. POSH compliance at Manas Center is led by Dr. Priya Dubey Sharma, Founder & Consulting Psychologist, as External Member.

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