POSH अधिनियम 2013 · भारत के नियोक्ताओं के लिए

POSH अनुपालन, आपकी समिति में एक मनोवैज्ञानिक के साथ

अगर आपके यहाँ 10 या उससे अधिक कर्मचारी हैं, तो कानून के अनुसार आपको एक आंतरिक समिति (Internal Committee) बनानी होती है। इस समिति में एक बाहरी सदस्य होना ज़रूरी है। डॉ. प्रिया दुबे शर्मा यह भूमिका निभाती हैं। हम आपकी POSH नीति और समिति भी तैयार करते हैं, और आपकी समिति को शिकायतों के लिए एक निजी ऑनलाइन पोर्टल देते हैं।

₹22,499 प्रति वर्ष से · लगभग ₹62 प्रति दिन · सेटअप शामिल · कीमतों में GST शामिल नहीं (कीमतें देखें)

क्या आपकी समिति वैध है? 2 मिनट की मुफ़्त जाँच करें (अंग्रेज़ी में) · 15 मिनट की कॉल बुक करें
पहले बात करना चाहते हैं? कॉल करें +91 99818 13224 · पूरे भारत में ऑनलाइन · Read in English
धारा 4(2)(c)
आपकी वैधानिक बाहरी सदस्य, Indradhanush Welfare Foundation के माध्यम से सूचीबद्ध
PhD · 18+ वर्ष
कठिन बातें संवेदनशीलता से सुनने में प्रशिक्षित मनोवैज्ञानिक, आपके कानूनी सलाहकार के साथ
एक खाता
सभी कार्यालय एक प्लान में, कुल कर्मचारियों की संख्या के आधार पर
आपको क्या मिलता है

POSH अनुपालन की ज़रूरी चीज़ें, एक प्लान में

एक वार्षिक प्लान में बाहरी सदस्य, आपके दस्तावेज़ और समिति का पोर्टल शामिल है। अधिनियम समय-समय पर जागरूकता कार्यक्रम भी माँगता है (धारा 19(c))। ये आप स्वयं कर सकते हैं, या हमारा प्रशिक्षण जोड़ सकते हैं।

  • डॉ. प्रिया दुबे शर्मा आपकी आंतरिक समिति में बाहरी सदस्य के रूप में। वे हर जाँच में भाग लेती हैं।
  • आपकी कंपनी के लिए तैयार POSH नीति, समिति गठन आदेश और नियुक्ति पत्र।
  • अधिनियम के नियमों पर आपकी समिति की जाँच: कम से कम चार सदस्य, आधी महिलाएँ, और पीठासीन अधिकारी एक महिला।
  • हर कार्यालय के लिए निजी शिकायत लिंक और QR कोड, साथ में 10 जागरूकता पोस्टर।
  • समिति के लिए निजी पोर्टल: हर सदस्य का अपना लॉगिन, और हर केस पर कानूनी समय-सीमाएँ।
  • ईमेल रिमाइंडर के साथ अनुपालन कैलेंडर, और तिमाही बैठकों का रिकॉर्ड।
  • आपके रिकॉर्ड से तैयार धारा 21 की वार्षिक रिपोर्ट, और SHe-Box पंजीकरण में चरण-दर-चरण मदद।
  • हर कार्यालय के लिए दिनांकित अनुपालन-स्थिति प्रमाणपत्र और ऑडिट पैक। ये मनस् के रिकॉर्ड हैं, सरकारी प्रमाणपत्र नहीं।

सेटअप शामिल है। अलग से कोई सेटअप शुल्क नहीं · एक खाता सभी कार्यालयों के लिए

मनस् कोई लॉ फ़र्म नहीं है और कानूनी सलाह नहीं देता। हम आपके कानूनी सलाहकार के साथ मिलकर काम करते हैं।

प्लान और कीमतें

एक वार्षिक प्लान, टीम के आकार के अनुसार

सभी कार्यालयों के कुल कर्मचारी गिनें, जिनमें अनुबंध कर्मचारी, प्रशिक्षु और इंटर्न भी शामिल हैं। एक खाता सभी स्थानों को कवर करता है।

30 कर्मचारियों तक
₹22,499/वर्ष
लगभग ₹62 प्रति दिन
यह प्लान चुनें
31–100 कर्मचारी
₹26,999/वर्ष
लगभग ₹74 प्रति दिन
यह प्लान चुनें
101–250 कर्मचारी
₹44,999/वर्ष
लगभग ₹123 प्रति दिन
यह प्लान चुनें
251–500 कर्मचारी
₹89,999/वर्ष
लगभग ₹247 प्रति दिन
यह प्लान चुनें
500 से अधिक
अनुरोध पर
आपके स्थानों के अनुसार
WhatsApp पर पूछें

हर प्लान में शामिल

  • ऊपर “आपको क्या मिलता है” में दी गई सभी सुविधाएँ, हर कार्यालय के लिए
  • डॉ. प्रिया समिति सदस्य के रूप में हर जाँच की सुनवाई और विचार-विमर्श में भाग लेती हैं, वीडियो पर या व्यवस्था के अनुसार व्यक्तिगत रूप से
  • प्लान सक्रिय होने पर उनका हस्ताक्षरित नामांकन पत्र

वैकल्पिक सेवाएँ

  • जागरूकता प्रशिक्षण: ₹6,999 प्रति ऑनलाइन सत्र (60–90 मिनट), कर्मचारियों, प्रबंधकों या समिति के लिए।
  • कार्यालय में प्रशिक्षण: ₹15,000 प्रति दिन, यात्रा और ठहरने का वास्तविक खर्च अलग।
  • प्रबंधित जाँच (Managed Inquiry): ₹18,000 प्रति केस। नोटिस, समय-निर्धारण, सुनवाई का रिकॉर्ड और रिपोर्ट का मसौदा हम तैयार करते हैं। फ़ैसला समिति ही करती है।

शुल्क पहले से तय होते हैं और किसी केस के नतीजे पर निर्भर नहीं करते। कीमतों में GST शामिल नहीं है। शर्तें भुगतान से पहले दिए जाने वाले सेवा अनुबंध में होती हैं। 14 दिन में पैसे वापस: भुगतान के 14 दिनों के भीतर अगर आप मन बदलते हैं, तो हम प्लान का पूरा शुल्क लौटा देते हैं, बशर्ते तब तक कोई हस्ताक्षरित दस्तावेज़ जारी न हुआ हो (रिफ़ंड नीति)।

संक्षेप में

कानून क्या कहता है? सात पंक्तियों में

मुख्य तथ्य: कार्यस्थल पर महिलाओं का लैंगिक उत्पीड़न (निवारण, प्रतिषेध और प्रतितोष) अधिनियम, 2013।
यह क्या है?कार्यस्थल पर महिलाओं का लैंगिक उत्पीड़न (निवारण, प्रतिषेध और प्रतितोष) अधिनियम, 2013, यानी POSH अधिनियम। नियोक्ता को कार्यस्थल पर महिलाओं के लैंगिक उत्पीड़न को रोकना होता है और शिकायत पर तय प्रक्रिया चलानी होती है। 9 दिसंबर 2013 से लागू।स्रोत: अधिनियम का पूरा पाठ ↗
किसे पालन करना है?10 या अधिक कर्मचारियों वाले हर नियोक्ता को आंतरिक समिति बनानी होती है। “कर्मचारी” में अनुबंध कर्मचारी, परिवीक्षाधीन, प्रशिक्षु और अप्रेंटिस भी शामिल हैं, चाहे वेतन मिले या नहीं।स्रोत: धारा 2(f), 4 और 6 ↗
समिति में कौन?पीठासीन अधिकारी के रूप में एक वरिष्ठ महिला कर्मचारी, कम से कम दो कर्मचारी सदस्य, और एक बाहरी सदस्य: किसी NGO से, या लैंगिक उत्पीड़न से जुड़े मुद्दों से परिचित व्यक्ति। कम से कम आधे सदस्य महिलाएँ हों।स्रोत: धारा 4(2) ↗
और क्या करना है?कार्यस्थल पर दंड के प्रावधान और समिति गठन आदेश प्रदर्शित करें। समय-समय पर जागरूकता कार्यक्रम चलाएँ। वार्षिक रिपोर्ट तैयार करें।स्रोत: धारा 19, 21 और 22 ↗
समय-सीमाएँशिकायत: घटना के 3 महीने के भीतर (समिति लिखित कारणों से 3 महीने और बढ़ा सकती है)। जाँच: 90 दिनों में। निष्कर्ष: जाँच पूरी होने के 10 दिनों में। नियोक्ता की कार्रवाई: रिपोर्ट के 60 दिनों में। वार्षिक रिपोर्ट: हर कैलेंडर वर्ष।स्रोत: धारा 9, 11(4), 13 और 21 ↗
दंड₹50,000 तक का जुर्माना। उसी अपराध में दोबारा दोषी पाए जाने पर दोगुना तक दंड, और लाइसेंस या पंजीकरण रद्द या नवीनीकृत न किया जाना।स्रोत: धारा 26 ↗
शिकायत कहाँ जाती है?आपकी आंतरिक समिति के पास। अगर समिति नहीं है, या शिकायत नियोक्ता के विरुद्ध है, तो ज़िले की स्थानीय समिति के पास। कोई भी महिला सरकार के SHe-Box पोर्टल पर ऑनलाइन शिकायत भी कर सकती है।स्रोत: धारा 6(1) और 9(1) ↗

· यह सामान्य जानकारी है, कानूनी सलाह नहीं। मनस् कोई लॉ फ़र्म नहीं है।

शिकायत आने पर

मनस् के साथ जाँच कैसे होती है?

कानून के अनुसार आपकी आंतरिक समिति शिकायत सुनती है और फ़ैसला करती है। डॉ. प्रिया उस समिति की पूर्ण सदस्य हैं, इसलिए वे हर जाँच में भाग लेती हैं।

चरण 1

शिकायत आती है

आपके निजी शिकायत लिंक से, या काग़ज़ पर। समिति और डॉ. प्रिया को सूचना मिलती है, और कानूनी समय-सीमाएँ शुरू हो जाती हैं।

चरण 2

सुलह, अगर वे चाहें

जाँच से पहले शिकायत करने वाली महिला सुलह (conciliation) का अनुरोध कर सकती हैं। पैसे के भुगतान को सुलह का आधार नहीं बनाया जा सकता (धारा 10)।

चरण 3

दोनों पक्षों की सुनवाई

समिति शिकायतकर्ता, प्रतिवादी और गवाहों को सुनती है। पीठासीन अधिकारी सहित कम से कम तीन सदस्य उपस्थित रहते हैं। डॉ. प्रिया हर सुनवाई और विचार-विमर्श में भाग लेती हैं।

चरण 4

निष्कर्ष और कार्रवाई

जाँच 90 दिनों में पूरी होनी चाहिए। निष्कर्ष उसके 10 दिनों में, और नियोक्ता की कार्रवाई 60 दिनों में (धारा 11 और 13)।

स्रोत: धारा 10, 11 और 13, POSH अधिनियम ↗

गोपनीयता

धारा 16 के आधार पर बना पोर्टल

POSH अधिनियम के अनुसार शिकायत और उससे जुड़े सभी लोगों के नाम गोपनीय रखने होते हैं। हमारा पोर्टल इसी नियम के आधार पर बना है।

  • केस का पूरा विवरण केवल आपकी समिति, बाहरी सदस्य और सहायता करने वाली मनस् टीम देख सकती है। समिति से बाहर के मालिक और HR को केवल केस की स्थिति और समय-सीमाएँ दिखती हैं।
  • नई शिकायत की सूचना समिति, डॉ. प्रिया और मनस् को जाती है, मालिक के खाते को नहीं। ईमेल में शिकायत का कोई विवरण नहीं होता।
  • हर केस देखने, फ़ाइल डाउनलोड करने और कार्रवाई का रिकॉर्ड रखा जाता है।
  • शिकायत फ़ॉर्म, केस पेज और पोर्टल पर कोई विज्ञापन या एनालिटिक्स ट्रैकर नहीं है।
  • शिकायत फ़ॉर्म हिंदी में भी उपलब्ध है। शिकायत करने वाली महिला ट्रैकिंग कोड से अपने केस की स्थिति ऑनलाइन देख सकती हैं।

सुरक्षा और गोपनीयता की पूरी जानकारी (अंग्रेज़ी में) · MSME और फ़ैक्ट्रियों के लिए POSH (अंग्रेज़ी में)

आपकी बाहरी सदस्य

डॉ. प्रिया दुबे शर्मा

डॉ. प्रिया दुबे शर्मा, मनस् की संस्थापक एवं परामर्श मनोवैज्ञानिक
Founder & Consulting Psychologist · Applied, Behavioural & Organisational Psychologist

वे भारतीय स्टेट बैंक, भोपाल सर्कल में सूचीबद्ध प्रोफ़ेशनल काउंसलर भी हैं। उनका डॉक्टोरल शोध बैंकिंग और IT कार्यस्थलों में मनोवैज्ञानिक कल्याण पर था। 2021–22 में वे उमंग किशोर हेल्पलाइन (UNFPA और मध्य प्रदेश सरकार) की प्रोग्राम ऑफ़िसर और प्रोग्राम इन-चार्ज रहीं, जहाँ उन्होंने कार्यक्रम का PSEA (यौन शोषण और दुर्व्यवहार से सुरक्षा) ढाँचा लिखा। 2026 में उन्होंने UNICEF के Agora लर्निंग प्लेटफ़ॉर्म पर PSEA पाठ्यक्रम और PSEA फ़ैसिलिटेटर प्रशिक्षण (कक्षा और वर्चुअल सत्रों के लिए), तथा राष्ट्रीय उत्पादकता परिषद (भारत सरकार) का कार्यस्थल पर लैंगिक उत्पीड़न की रोकथाम (POSH) ई-लर्निंग मॉड्यूल भी पूरा किया।

PhD, Organisational Psychology · M.Phil, Health Psychology · 18+ वर्ष · POSH अधिनियम धारा 4(2)(c) के तहत सूचीबद्ध बाहरी सदस्य, Indradhanush Welfare Foundation के माध्यम से · POSH ई-लर्निंग, राष्ट्रीय उत्पादकता परिषद (2026) · PSEA और फ़ैसिलिटेटर प्रशिक्षण, UNICEF Agora (2026)
पूरा प्रोफ़ाइल (अंग्रेज़ी में)
सामान्य प्रश्न

POSH के बारे में आप क्या जानना चाहते हैं?

अधिक प्रश्नों के उत्तर (अंग्रेज़ी में): POSH FAQ

POSH अधिनियम क्या है?
यह कार्यस्थल पर महिलाओं का लैंगिक उत्पीड़न (निवारण, प्रतिषेध और प्रतितोष) अधिनियम, 2013 है (2013 का अधिनियम संख्या 14), जो 9 दिसंबर 2013 से लागू है। इसके तहत नियोक्ता को कार्यस्थल पर महिलाओं के लैंगिक उत्पीड़न को रोकना होता है, शिकायतें सुनने के लिए आंतरिक समिति बनानी होती है, और तय समय-सीमा में जाँच की प्रक्रिया अपनानी होती है।
क्या छोटी कंपनियों और स्टार्टअप के लिए भी POSH अनुपालन ज़रूरी है?
हाँ। भारत में 10 या अधिक कर्मचारियों वाले हर कार्यस्थल को POSH अधिनियम, 2013 का पालन करना होता है, चाहे आकार, क्षेत्र या फ़ंडिंग का चरण कुछ भी हो। लिखित नीति, बाहरी सदस्य सहित आंतरिक समिति, जागरूकता कार्यक्रम और वार्षिक रिपोर्ट, सभी ज़रूरी हैं। गिनती में अस्थायी, दैनिक वेतन और अनुबंध कर्मचारी, परिवीक्षाधीन, प्रशिक्षु और अप्रेंटिस भी शामिल होते हैं (धारा 2(f) और 4)।
क्या मेरी कंपनी को POSH बाहरी सदस्य की ज़रूरत है?
हाँ, अगर किसी भी कार्यस्थल पर 10 या अधिक कर्मचारी हैं। धारा 4(2)(c) के अनुसार आंतरिक समिति में संगठन के बाहर से एक सदस्य होना चाहिए: किसी NGO या संस्था से, या लैंगिक उत्पीड़न से जुड़े मुद्दों से परिचित व्यक्ति। बाहरी सदस्य के बिना समिति वैध नहीं मानी जाती, चाहे उसमें कितने भी आंतरिक सदस्य हों।
POSH का पालन न करने पर क्या दंड है?
धारा 26 के तहत पहली बार दोषी पाए जाने पर ₹50,000 तक का जुर्माना हो सकता है। उसी अपराध में दोबारा दोषी पाए जाने पर दोगुना तक दंड, और लाइसेंस या पंजीकरण रद्द या नवीनीकृत न किया जाना संभव है। 2019 के मध्य प्रदेश के एक मामले में, जहाँ नियोक्ता के पास आंतरिक समिति नहीं थी और शिकायत सही पाई गई, हाई कोर्ट ने शिकायतकर्ता को ₹25 लाख के मुआवज़े का हक़दार भी माना।
मनस् के साथ अनुपालन कितनी जल्दी हो सकता है?
आपका मूल सेटअप कुछ ही दिनों में तैयार हो सकता है। पंजीकरण करते ही आपकी नीति, समिति गठन आदेश और नियुक्ति पत्र आपकी कंपनी के अनुसार तैयार हो जाते हैं, और प्लान सक्रिय होने तक वॉटरमार्क वाले ड्राफ़्ट के रूप में दिखते हैं। प्लान सक्रिय होते ही डॉ. प्रिया बाहरी सदस्य के रूप में जुड़ती हैं और हस्ताक्षरित दस्तावेज़ जारी होते हैं।
क्या बाहरी सदस्य हर जाँच की सुनवाई में आती हैं?
हाँ। डॉ. प्रिया हर जाँच की सुनवाई और समिति के विचार-विमर्श में भाग लेती हैं, वीडियो पर या व्यवस्था के अनुसार व्यक्तिगत रूप से। यह आपके प्लान में शामिल है। हम ऐसी व्यवस्था नहीं देते जिसमें वे केवल बाद में निष्कर्ष देखें, क्योंकि जो सदस्य फ़ैसला करता है, उसे केस सुनना भी चाहिए।
क्या हमारे मालिक या HR पोर्टल में शिकायत का विवरण देख सकते हैं?
नहीं, जब तक वे स्वयं आंतरिक समिति के सदस्य न हों। मालिक और HR को केवल यह दिखता है कि केस है, उसकी स्थिति और समय-सीमाएँ। शिकायत में क्या लिखा है या किसने की है, यह नहीं दिखता। नई शिकायत की सूचना समिति, डॉ. प्रिया और मनस् को जाती है, मालिक के खाते को नहीं।
हम भुगतान करके प्लान कैसे सक्रिय करें?
पोर्टल से। आप Razorpay के माध्यम से ऑनलाइन भुगतान कर सकते हैं (कार्ड और UPI का विवरण हमारे सर्वर तक नहीं पहुँचता)। या “Request activation” चुनें, और हमारी टीम भुगतान पूरा कराने के लिए आपसे संपर्क करेगी। प्लान सक्रिय होते ही डॉ. प्रिया आपकी समिति में जुड़ जाती हैं और हस्ताक्षरित दस्तावेज़ जारी होते हैं। कीमतों में GST शामिल नहीं है।
क्या मनस् भोपाल और मध्य प्रदेश में POSH सेवा देता है?
हाँ। मनस् का केंद्र शॉप नंबर 1, HIG 379, H सेक्टर, अयोध्या नगर, भोपाल में है। हम भोपाल, इंदौर, जबलपुर, ग्वालियर और पूरे मध्य प्रदेश के नियोक्ताओं के लिए POSH अनुपालन तैयार करते हैं, और डॉ. प्रिया दुबे शर्मा सुनवाई में वीडियो पर या व्यवस्था के अनुसार व्यक्तिगत रूप से भाग लेती हैं। भोपाल और मध्य प्रदेश के लिए गाइड (अंग्रेज़ी में)।
POSH अनुपालन का खर्च कितना है?
कुल कर्मचारियों की संख्या के अनुसार वार्षिक प्लान: 30 तक ₹22,499; 31 से 100 तक ₹26,999; 101 से 250 तक ₹44,999; 251 से 500 तक ₹89,999; 500 से अधिक के लिए अनुरोध पर। सेटअप शामिल है, और कीमतों पर GST अलग से लगता है।
शिकायत कितने समय के भीतर करनी होती है?
घटना के तीन महीने के भीतर, लिखित में; कई घटनाओं में आख़िरी घटना से। उचित कारण होने पर समिति यह समय तीन महीने और बढ़ा सकती है (धारा 9)। जाँच 90 दिनों में पूरी करनी होती है (धारा 11(4))। स्रोत: POSH अधिनियम।
अगर आपके यहाँ 10 से कम कर्मचारी हैं तो क्या करें?
तब आपको अपनी आंतरिक समिति नहीं बनानी होती। आपके कार्यस्थल की शिकायत ज़िले की स्थानीय समिति (Local Committee) सुनती है, जिसे ज़िला अधिकारी बनाते हैं (धारा 6)। धारा 19 के सामान्य कर्तव्य, जैसे नीति और जागरूकता, फिर भी लागू रहते हैं।
POSH की वार्षिक रिपोर्ट कब देनी होती है?
हर कैलेंडर वर्ष। आंतरिक समिति वार्षिक रिपोर्ट बनाकर नियोक्ता और ज़िला अधिकारी को देती है (धारा 21), और नियोक्ता अपनी वार्षिक रिपोर्ट में मामलों की संख्या शामिल करता है (धारा 22)। मनस् आपके पोर्टल रिकॉर्ड से यह रिपोर्ट तैयार करता है, जिसे आपकी समिति जाँचकर जमा करती है।
मध्य प्रदेश हाई कोर्ट ने POSH पर क्या कहा है?
2019 के इंदौर मामले में एक निजी अस्पताल में आंतरिक समिति नहीं थी; हाई कोर्ट ने अस्पताल को ₹50,000 का दंड चुकाने का निर्देश दिया और शिकायतकर्ता को ₹25 लाख का हकदार माना (फ़ैसला)। 2026 के एक मामले में कोर्ट ने कहा कि ऐसी शिकायत की जाँच केवल आंतरिक या स्थानीय समिति ही कर सकती है। चारों फ़ैसले (अंग्रेज़ी में)।

स्रोत: POSH अधिनियम का पूरा पाठ ↗

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ऑनलाइन कुछ ही मिनटों में पंजीकरण करें। या हमें अपनी टीम का आकार और स्थान बताएँ, हम आपको बताएँगे कि आपको ठीक-ठीक क्या चाहिए।

या कॉल करें +91 99818 13224 · ईमेल manu@manas365.com