POSH अधिनियम, 2013 · धारा 21

POSH अधिनियम की धारा 21: समिति की वार्षिक रिपोर्ट

धारा 21 के तहत आंतरिक समिति (Internal Committee), या स्थानीय समिति (Local Committee), को हर कैलेंडर वर्ष में एक वार्षिक रिपोर्ट तैयार करनी होती है। यह रिपोर्ट नियोक्ता और ज़िला अधिकारी को जाती है। ज़िला अधिकारी इन रिपोर्टों पर एक संक्षिप्त रिपोर्ट राज्य सरकार को भेजता है। 2013 के नियमों का नियम 14 रिपोर्ट के पांच विवरण तय करता है। अधिनियम या नियमों में इसकी तारीख तय नहीं है।

लेखक: मनस् संपादकीय टीम (Manas Editorial Team) · अंतिम जांच: · आधिकारिक पाठ से मिलान किया गया · English version

आधिकारिक पाठ

धारा 21 क्या कहती है?

धारा 21, India Code से शब्दशः (अंग्रेज़ी में, जैसा छपा है), साथ में धारा 19(j) में नियोक्ता का इससे जुड़ा कर्तव्य। हमारी टिप्पणी इसके नीचे है।

स्रोत: India Code PDF ↗, पृष्ठ 12
स्रोत: India Code PDF ↗, पृष्ठ 11 और 12
स्रोत: भारत का राजपत्र, G.S.R. 769(E), 9 दिसंबर 2013 ↗ (सरकारी S3WaaS साइट पर स्कैन, PDF पृष्ठ 20)। नियम 2 के अनुसार “Complaints Committee” का अर्थ है आंतरिक समिति या स्थानीय समिति। पूरा नियम 14: POSH नियम, 2013: वार्षिक रिपोर्ट।
सरल शब्दों में

धारा 21 का मतलब क्या है?

रिपोर्ट कौन लिखता है। रिपोर्ट समिति लिखती है, HR नहीं। किसी कंपनी में यह आंतरिक समिति है। ज़िले की स्थानीय समिति अपनी अलग रिपोर्ट लिखती है।

कितनी बार। “in each calendar year”, यानी हर कैलेंडर वर्ष में एक बार। हमारी समझ में इसका अर्थ जनवरी से दिसंबर है। कंपनी की बोर्ड रिपोर्ट (Board’s Report) वित्तीय वर्ष पर चलती है, इसलिए दोनों के आंकड़े अलग हो सकते हैं। देखें बोर्ड रिपोर्ट में POSH (English)।

रिपोर्ट किसे मिलती है। दो को: नियोक्ता को और ज़िला अधिकारी को। फिर ज़िला अधिकारी सभी रिपोर्टों का एक छोटा सार राज्य सरकार को भेजता है (धारा 21(2))।

रिपोर्ट में क्या होता है। अधिनियम रिपोर्ट का प्रारूप और समय नियमों पर छोड़ता है। 2013 के नियमों का नियम 14 पांच विवरण तय करता है: साल में मिली शिकायतें, निपटाई गई शिकायतें, 90 दिन से ज़्यादा लंबित मामले, कराई गई कार्यशालाएं या जागरूकता कार्यक्रम, और नियोक्ता या ज़िला अधिकारी की कार्रवाई का स्वरूप।

कब तक। अधिनियम कहता है “at such time as may be prescribed” (ऐसे समय पर जो नियमों में तय हो)। 2013 के नियम रिपोर्ट की सामग्री बताते हैं, पर कोई तारीख नहीं देते। इसलिए देखें कि आपकी राज्य सरकार या ज़िला अधिकारी ने कोई तारीख मांगी है या नहीं।

नियोक्ता की भूमिका। धारा 19(j) नियोक्ता से कहती है कि वह समिति की रिपोर्टें समय पर जमा होने पर नज़र रखे। इसलिए आपको पता होना चाहिए कि आपकी समिति रिपोर्ट कब जमा करती है, और आपके पास उसकी एक प्रति होनी चाहिए।

नियोक्ता की जांच-सूची

धारा 21 के लिए आपको क्या करना चाहिए?

  • अपनी समिति से हर कैलेंडर वर्ष (जनवरी से दिसंबर) के लिए एक रिपोर्ट तैयार करवाएं।
  • जांचें कि रिपोर्ट में नियम 14 के पांचों विवरण हैं, कार्यशालाओं की संख्या भी।
  • सुनिश्चित करें कि रिपोर्ट आपको और ज़िला अधिकारी, दोनों को मिले, और भेजने का प्रमाण रखें।
  • रिपोर्ट का समय आने से पहले पता करें कि आपके ज़िले का ज़िला अधिकारी कौन है (धारा 5)।
  • शिकायत रजिस्टर पूरे साल अद्यतन रखें, ताकि संख्याएं गिनना आसान हो।
  • अपने कैलेंडर में याद-दिहानी लगाएं: धारा 19(j) के तहत रिपोर्ट समय पर जमा होने पर नज़र रखना आपका कर्तव्य है।
  • यही रजिस्टर धारा 22 के तहत अपनी वार्षिक रिपोर्ट के लिए भी इस्तेमाल करें।
मुख्य संख्याएं

धारा 21 की रिपोर्ट के लिए कौन सी संख्याएं मायने रखती हैं?

धारा 21 और POSH नियम, 2013 के नियम 14 के अनुसार, 26 अक्टूबर 2026 को जांची गईं।
कितनी बारहर कैलेंडर वर्ष में 1 रिपोर्टधारा 21(1)
अवधिजनवरी से दिसंबर (हमारी समझ)“in each calendar year”, धारा 21(1)
किसे जाती है2: नियोक्ता और ज़िला अधिकारीधारा 21(1)
आगे की रिपोर्टज़िला अधिकारी से राज्य सरकार कोधारा 21(2)
सामग्री5 विवरणनियम 14(a) से (e)
गिने जाने वाले लंबित मामलेजो 90 दिन से ज़्यादा लंबित हैंनियम 14(c)
अंतिम तारीखअधिनियम या 2013 के नियमों में तय नहींधारा 21(1) इसे नियमों पर छोड़ती है; नियम 14 केवल सामग्री तय करता है
हर मामले की जांच की समय-सीमा90 दिनधारा 11(4); इससे लंबा खुला मामला नियम 14(c) में दिखता है
जांच रिपोर्ट नियोक्ता कोजांच पूरी होने के 10 दिन के भीतरधारा 13(1)
निष्कर्षों पर नियोक्ता की कार्रवाई60 दिन के भीतरधारा 13(4); ऐसी कार्रवाई का स्वरूप नियम 14(e) में दर्ज होता है
अदालती फैसले

क्या अदालतों ने धारा 21 पर फैसला दिया है?

हमें धारा 21 की व्याख्या करने वाला सर्वोच्च न्यायालय का कोई रिपोर्टेड फैसला नहीं मिला (26 अक्टूबर 2026 को जांचा गया)। लेकिन न्यायालय ने उन कर्तव्यों पर ज़ोर दिया है जिनसे यह रिपोर्ट बनती है।

सर्वोच्च न्यायालय, सिविल अपील संख्या 2482/2014 (फैसला 12 मई 2023)

न्यायालय ने निर्देश दिया: “The authorities/management/employers shall regularly conduct orientation programmes, workshops, seminars and awareness programmes to upskill members of the ICCs/LCs/ICs and to educate women employees and women’s groups about the provisions of the Act, the Rules and relevant regulations.” (पैरा 77(v))। यानी प्राधिकरण, प्रबंधन और नियोक्ता समिति सदस्यों, महिला कर्मचारियों और महिला समूहों के लिए नियमित रूप से अभिविन्यास कार्यक्रम, कार्यशालाएं, सेमिनार और जागरूकता कार्यक्रम कराएं। कराई गई कार्यशालाओं की संख्या वार्षिक रिपोर्ट के पांच विवरणों में से एक है (नियम 14(d))।

इसी फैसले में न्यायालय ने कहा: “It is disquieting to note that there are serious lapses in the enforcement of the Act even after such a long passage of time.” (पैरा 75)। (12 मई 2023 का फैसला ↗)

सवाल

धारा 21 के बारे में नियोक्ता क्या पूछते हैं?

धारा 21 की वार्षिक रिपोर्ट कौन तैयार करता है?
आंतरिक समिति अपने कार्यस्थल के लिए इसे तैयार करती है। स्थानीय समिति अपने पास आई शिकायतों के लिए अपनी रिपोर्ट तैयार करती है। नियोक्ता का काम यह देखना है कि रिपोर्ट समय पर जमा हो (धारा 19(j))।
वार्षिक रिपोर्ट किसे मिलती है?
नियोक्ता और ज़िला अधिकारी को (धारा 21(1))। फिर ज़िला अधिकारी मिली हुई सभी रिपोर्टों पर एक संक्षिप्त रिपोर्ट राज्य सरकार को भेजता है (धारा 21(2))।
क्या धारा 21 की रिपोर्ट की कोई अंतिम तारीख है?
अधिनियम कहता है कि रिपोर्ट हर कैलेंडर वर्ष में “at such time as may be prescribed” तैयार हो। 2013 के नियम सामग्री तय करते हैं, पर तारीख नहीं। अपनी राज्य सरकार या ज़िला अधिकारी के निर्देश देखें।
अगर साल में कोई शिकायत नहीं आई, तो क्या रिपोर्ट फिर भी चाहिए?
हां। कर्तव्य “in each calendar year” रिपोर्ट तैयार करने का है, शिकायत हो या न हो। रिपोर्ट में शून्य शिकायतें और कराई गई कार्यशालाएं दर्ज होती हैं (नियम 14)।
क्या धारा 21 की रिपोर्ट और नियोक्ता की वार्षिक रिपोर्ट एक ही हैं?
नहीं। धारा 21 समिति की रिपोर्ट है, जो नियोक्ता और ज़िला अधिकारी को जाती है। धारा 22 नियोक्ता की अपनी वार्षिक रिपोर्ट से जुड़ी है, जिसमें मामलों की संख्या और उनका निपटारा बताना होता है। देखें धारा 22।
मनस् कैसे मदद करता है

मनस् धारा 21 की रिपोर्ट कैसे तैयार करता है?

हमारा पोर्टल समिति का शिकायत रजिस्टर रखता है और उसी से नियम 14 के विवरणों के साथ धारा 21 की वार्षिक रिपोर्ट बनाता है, जिसे समिति देखकर जमा करती है। डॉ. प्रिया दुबे शर्मा, संस्थापक एवं परामर्श मनोवैज्ञानिक (Founder & Consulting Psychologist), हमारे ग्राहकों की समितियों में बाहरी सदस्य के रूप में काम करती हैं। यह कैसे होता है, यह हमारे POSH अनुपालन पेज पर देखें, या 2 मिनट की मुफ़्त समिति जांच करें। और जवाबों के लिए POSH FAQ पढ़ें।

स्रोत

यह पेज किन स्रोतों पर आधारित है?

इन स्रोतों से अंतिम बार मिलान को किया गया। अधिनियम का पाठ हमारी टिप्पणी के साथ पुनः प्रस्तुत है (Copyright Act, 1957, s.52(1)(q)(ii)); राजपत्र के नियम और अदालती फैसले s.52(1)(q)(i) और (iv) के तहत। यह सामान्य जानकारी है, कानूनी सलाह नहीं। मनस् कोई विधि फर्म नहीं है।

पुस्तकालय में और पढ़ें:

POSH संबंधी पूछताछ

क्या आप अपनी समिति पर दूसरी नज़र चाहते हैं?

मुफ़्त जांच करें, या मनु अनिरुद्ध शर्मा से बात करें, जो मनस् में POSH संबंधी पूछताछ संभालते हैं।

मनु अनिरुद्ध शर्मा · +91 95843 22224 · manu@manas365.com

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