त्वरित उत्तर: सही नशा-मुक्ति सहायता चुनने के लिए पहले यह देखिए कि आकलन कौन करता है, योजना आपके पदार्थ और स्थिति के हिसाब से बनती है या नहीं, परिवार और फ़ॉलो-अप शामिल हैं या नहीं, और कोई पक्के नतीजे का वादा तो नहीं कर रहा। मनस् आपातकालीन सेवा नहीं है। आपात स्थिति में 112 पर कॉल करें या नज़दीकी अस्पताल के आपातकालीन विभाग में जाएँ।
नशे की लत से जूझ रहे व्यक्ति या उसके परिवार के लिए सबसे मुश्किल सवाल अक्सर यही होता है कि शुरुआत कहाँ से करें। विकल्प बहुत हैं और हर जगह बड़े दावे हैं। इस लेख में हम आसान भाषा में बताएँगे कि कौन-से सवाल पूछें, क्या देखें और किन बातों से सावधान रहें। यह जानकारी सामान्य मार्गदर्शन है, किसी जाँच या इलाज का विकल्प नहीं।
भारत में नशे की स्थिति क्या है, और मदद क्यों नहीं मिल पाती?
भारत सरकार के सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्रालय के लिए एम्स के राष्ट्रीय औषधि निर्भरता उपचार केंद्र (NDDTC) ने 2018 में देशव्यापी सर्वेक्षण किया था, जिसकी रिपोर्ट फरवरी 2019 में सौंपी गई। इसमें 186 जिलों के 4,73,569 लोगों से बात की गई थी। नतीजों के मुताबिक 10 से 75 वर्ष के लगभग 14.6 प्रतिशत लोग (करीब 16 करोड़) शराब का सेवन करते हैं, और लगभग 5.2 प्रतिशत (5.7 करोड़ से अधिक) का सेवन हानिकारक या निर्भरता वाला है।
उसी सर्वेक्षण में करीब 2.8 प्रतिशत लोगों (लगभग 3.1 करोड़) ने पिछले 12 महीनों में कैनबिस उत्पाद का उपयोग बताया, और लगभग 60 लाख लोगों में अफ़ीम-वर्ग के पदार्थों का हानिकारक या निर्भरता वाला उपयोग पाया गया। एक और बात ध्यान देने लायक है: शराब पर निर्भर हर 38 में से लगभग एक व्यक्ति को ही किसी तरह का उपचार मिला। यानी समस्या बड़ी है, पर मदद तक पहुँच बहुत कम है। इसलिए पहला कदम उठाना ही बड़ी बात है।
विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) के अनुसार 2019 में दुनिया भर में लगभग 26 लाख मौतें शराब से जुड़ी थीं, और 15 वर्ष से ऊपर के करीब 40 करोड़ लोगों में शराब-सेवन विकार था। यह आँकड़े बताते हैं कि आप अकेले नहीं हैं और यह स्थिति गंभीरता से लेने योग्य है।
नशा-मुक्ति सहायता चुनने से पहले कौन-से सवाल पूछें?
किसी भी केंद्र, क्लिनिक या कार्यक्रम से बात करते समय ये सवाल पूछिए। साफ़ और सीधे जवाब मिलना अपने आप में एक अच्छा संकेत है।
- शुरुआती आकलन कौन करता है, और उसकी योग्यता क्या है?
- योजना हर व्यक्ति के लिए अलग बनती है, या सबके लिए एक ही ढर्रा है?
- पहले चिकित्सकीय जाँच होती है या नहीं, खासकर शराब के मामले में?
- परिवार को किस तरह शामिल किया जाता है?
- कार्यक्रम ख़त्म होने के बाद फ़ॉलो-अप और रोकथाम की क्या व्यवस्था है?
- सत्र ऑनलाइन हैं या आमने-सामने, और गोपनीयता कैसे रखी जाती है?
कौन-से विकल्प हैं और वे किसके लिए ठीक बैठते हैं?
नीचे दी गई तालिका एक सामान्य तुलना है। असली फ़ैसला हमेशा आकलन के बाद, योग्य पेशेवर की सलाह से होना चाहिए।
| विकल्प | कैसे काम करता है | किसके लिए अक्सर उपयुक्त | ध्यान रखने की बात |
|---|---|---|---|
| परामर्श-आधारित कार्यक्रम (बाह्य-रोगी या ऑनलाइन) | नियमित सत्र, सोच और व्यवहार पर काम, फ़ॉलो-अप | जिन्हें घर पर रहकर काम करना संभव है और सहारा मौजूद है | नियमितता ज़रूरी; चिकित्सकीय जाँच ज़रूरत हो तो अलग से |
| चिकित्सकीय निगरानी वाली सहायता | डॉक्टर की देखरेख में आकलन और प्रबंधन | शराब जैसे मामले, जहाँ अचानक छोड़ना जोखिम भरा हो सकता है | खुद से अचानक बंद न करें; पहले डॉक्टर से सलाह लें |
| आवासीय या भर्ती वाली व्यवस्था | कुछ समय निगरानी वाले माहौल में रहना | जहाँ घर का माहौल सहयोगी न हो या स्थिति गंभीर हो | लाइसेंस, कर्मचारियों की योग्यता और व्यक्ति की सहमति देखें |
| सहयोगी समूह | समान अनुभव वाले लोगों का साथ | इलाज के साथ या बाद में सहारे के लिए | इसे अकेला पर्याप्त इलाज न मानें |
कौन-सी बातें चेतावनी का संकेत हैं?
कुछ संकेत देखकर आप सतर्क हो सकते हैं। पहला, “पक्का इलाज” या “हफ़्ते भर में छुटकारा” जैसे वादे। नशे से उबरना एक प्रक्रिया है और कोई ईमानदार संस्था नतीजे की गारंटी नहीं देती। दूसरा, बिना आकलन के सबको एक जैसा कार्यक्रम देना। तीसरा, परिवार से सारी बातें छिपाना या व्यक्ति को उसकी मर्ज़ी के बिना रखना। चौथा, फ़ीस या शर्तों पर साफ़ जानकारी न देना। पाँचवाँ, कार्यक्रम ख़त्म होने के बाद किसी फ़ॉलो-अप का न होना, जबकि फिसलन का जोखिम इसी दौर में सबसे ज़्यादा महसूस होता है।
परिवार इस सफ़र में कैसे साथ दे सकता है?
नशे की आदत सिर्फ़ एक व्यक्ति की नहीं, पूरे घर की कहानी बन जाती है। ताने, धमकी या शर्मिंदा करने से अक्सर व्यक्ति और छिप जाता है। इसकी जगह शांत समय चुनिए, “मुझे आपकी चिंता है” जैसी भाषा में बात कीजिए और यह साफ़ कीजिए कि आप साथ चलने को तैयार हैं। साथ ही अपना ख़्याल भी रखिए। परिवार के सदस्य भी परामर्शदाता से मार्गदर्शन ले सकते हैं, ताकि वे थकान और अपराध-बोध के बोझ में न दबें।
मनस् का विमुक्ति कार्यक्रम क्या है?
मनस् सेंटर की वेबसाइट के अनुसार विमुक्ति तंबाकू, कैनबिस और शराब के लिए बना कार्यक्रम है, जो केवल लालसा संभालने पर नहीं, बल्कि नशे को टिकाए रखने वाली मान्यताओं पर भी काम करता है। इसके तीन रूप हैं।
| कार्यक्रम | पदार्थ | अवधि (वेबसाइट के अनुसार) |
|---|---|---|
| विमुक्ति 21 | तंबाकू (सिगरेट, बीड़ी, वेपिंग, चबाने वाला तंबाकू) | 28 दिन (21 मुख्य + 7 सहायता) |
| विमुक्ति 45 | कैनबिस (गांजा, चरस, भांग आदि) | 45 दिन |
| विमुक्ति 90 | शराब | 90 दिन, साथ में 6 महीने का सामुदायिक सहयोग |
शराब वाले कार्यक्रम से पहले चिकित्सकीय जाँच रखी गई है, और कार्यक्रम में परिवार का एक सत्र तथा साथियों का सहयोग भी शामिल बताया गया है। यह भोपाल में आमने-सामने और पूरे भारत में ऑनलाइन उपलब्ध है। पूरी जानकारी आप विमुक्ति पेज पर देख सकते हैं। यह कार्यक्रम किसी चिकित्सकीय निदान या इलाज का दावा नहीं करता और नतीजे की गारंटी नहीं देता।
अगर स्थिति आपातकालीन लगे तो क्या करें?
अगर आपको या किसी अपने को ख़ुद को नुकसान पहुँचाने के विचार आ रहे हों, नशे के कारण तबीयत बहुत बिगड़ रही हो, या छोड़ने पर घबराहट, कंपकंपी या बेहोशी जैसे लक्षण दिखें, तो इंतज़ार मत कीजिए। मनस् आपातकालीन सेवा नहीं है। आपात स्थिति में तुरंत 112 पर कॉल करें या नज़दीकी अस्पताल के आपातकालीन विभाग में जाएँ।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
नहीं। कई लोगों के लिए नियमित सत्रों वाला बाह्य-रोगी या ऑनलाइन कार्यक्रम काफ़ी हो सकता है। भर्ती या चिकित्सकीय निगरानी की ज़रूरत शराब जैसे मामलों में अधिक पड़ती है। सही रास्ता आपकी स्थिति के आकलन के बाद तय होता है।
आप किसी परामर्शदाता या डॉक्टर से शुरू कर सकते हैं। मनस् आपातकालीन सेवा नहीं है। आपात स्थिति में 112 पर कॉल करें या नज़दीकी अस्पताल के आपातकालीन विभाग में जाएँ। पहली बातचीत में आपको बस अपनी स्थिति बतानी है, कोई फ़ैसला नहीं लेना।
काफ़ी अहम। परिवार दबाव या ताने की जगह समझ और स्थिरता दे सके, तो बदलाव टिकाऊ बनने की संभावना बढ़ती है। अच्छा कार्यक्रम परिवार को भी एक सत्र या मार्गदर्शन में शामिल करता है, ताकि घर का माहौल मदद करे।
ज़बरदस्ती अक्सर उलटा असर करती है। शांत समय पर, आरोप लगाए बिना अपनी चिंता बताइए और साथ चलने की पेशकश कीजिए। आप खुद भी किसी परामर्शदाता से सलाह ले सकते हैं कि बातचीत कैसे शुरू करें।
नहीं। कोई भी ईमानदार कार्यक्रम पक्के नतीजे का वादा नहीं करता। नशे से उबरना एक प्रक्रिया है, जिसमें फिसलन भी आ सकती है। असली कसौटी यह है कि कार्यक्रम योजना, फ़ॉलो-अप और रोकथाम पर कितना ध्यान देता है।
मनस् की वेबसाइट के अनुसार विमुक्ति तंबाकू (विमुक्ति 21), भांग-गांजा जैसे कैनबिस उत्पादों (विमुक्ति 45) और शराब (विमुक्ति 90) के लिए अलग-अलग कार्यक्रम देता है। यह भोपाल में आमने-सामने या पूरे भारत में ऑनलाइन उपलब्ध है।
अगला कदम: आज एक छोटी बातचीत से शुरू कीजिए
सही सहायता चुनना एक दिन में नहीं होता, पर शुरुआत एक बातचीत से हो सकती है। आप विमुक्ति कार्यक्रम के बारे में पढ़ सकते हैं, या मनस् सेंटर से संपर्क करके अपनी स्थिति बता सकते हैं। आपकी जानकारी गोपनीय रखी जाती है और पहली बातचीत में कोई फ़ैसला लेना ज़रूरी नहीं।
स्रोत
Plain-language guides on mental wellbeing, based on published research. Counselling at Manas Center is led by Dr. Priya Dubey Sharma, Founder & Consulting Psychologist.



