POSH अधिनियम की धारा 4: आंतरिक समिति में कौन होता है
POSH अधिनियम की धारा 4 के तहत हर नियोक्ता को लिखित आदेश से आंतरिक समिति बनानी होती है, और अलग-अलग जगहों पर स्थित हर कार्यालय या प्रशासनिक इकाई में अलग समिति बनानी होती है। इसमें एक वरिष्ठ स्तर की महिला कर्मचारी पीठासीन अधिकारी होती हैं, कम से कम दो कर्मचारी सदस्य होते हैं, और एक बाहरी सदस्य। कम से कम आधे सदस्य महिलाएं हों, और कार्यकाल अधिकतम तीन वर्ष है।
लेखक: मनस् संपादकीय टीम (Manas Editorial Team) · अंतिम जांच: · आधिकारिक पाठ से मिलान किया गया · English version
धारा 4 क्या कहती है?
धारा 4 पूरी, India Code से शब्दशः, अंग्रेज़ी में, जैसा छपा है। अधिनियम का आधिकारिक हिंदी पाठ हमें India Code या ई-राजपत्र पर नहीं मिला (29 अक्टूबर 2026 को खोजा गया), इसलिए यहां अंग्रेज़ी पाठ है और हमारी हिंदी टिप्पणी इसके नीचे, भाग 3 में है। धारा 4 का शीर्षक और धारा 4(1) “Internal Complaints Committee” कहते हैं; धारा 2(h) इसी समिति के लिए छोटा शब्द “Internal Committee” (आंतरिक समिति) तय करती है, और बाकी अधिनियम यही शब्द इस्तेमाल करता है।
धारा 4 का मतलब क्या है?
लिखित आदेश। समिति तभी बनती है जब नियोक्ता लिखित आदेश (order in writing) जारी करता है। यह आदेश कार्यस्थल पर किसी ऐसी जगह लगाएं जहां सबको दिखे (धारा 19(b))।
हर कार्यालय में एक। अगर आपके कार्यालय या प्रशासनिक इकाइयां अलग-अलग जगहों पर, या मंडल या उप-मंडल स्तर पर हैं, तो हर एक में अपनी समिति होनी चाहिए (धारा 4(1) का परंतुक)।
पीठासीन अधिकारी (Presiding Officer)। वह कर्मचारियों में से वरिष्ठ स्तर पर नियुक्त एक महिला होनी चाहिए। आपके कार्यालय में ऐसी कोई न हो, तो उसी कार्यस्थल के दूसरे कार्यालय या इकाई से नामित करें। वहां भी न हो, तो उसी नियोक्ता के किसी दूसरे कार्यस्थल से, या किसी दूसरे विभाग या संगठन से।
कर्मचारी सदस्य। कम से कम दो। प्राथमिकता उन्हें दें जो महिलाओं के हित के लिए प्रतिबद्ध हैं, या जिन्हें सामाजिक कार्य का अनुभव या कानूनी जानकारी है।
बाहरी सदस्य। एक सदस्य, महिलाओं के हित के लिए प्रतिबद्ध किसी गैर-सरकारी संगठन (NGO) या संघ से, या कोई ऐसा व्यक्ति जो लैंगिक उत्पीड़न से जुड़े मुद्दों से परिचित हो (धारा 4(2)(c))। नियोक्ता इस सदस्य को नियमों में तय फीस या भत्ता देता है (धारा 4(4), नियम 3)।
महिलाओं की संख्या। नामित सदस्यों में से कम से कम आधी महिलाएं हों (धारा 4(2) का परंतुक)। एक पीठासीन अधिकारी, दो कर्मचारी सदस्य और एक बाहरी सदस्य के साथ सबसे छोटी समिति चार लोगों की होती है; तब कम से कम दो महिलाएं होनी चाहिए, जिनमें पीठासीन अधिकारी शामिल हैं।
कार्यकाल। हर सदस्य अधिकतम तीन वर्ष तक, नामांकन की तारीख से, उतनी अवधि के लिए पद पर रहता है जितनी नियोक्ता तय करे (धारा 4(3))।
हटाना। धारा 4(5) चार आधार देती है, जिन पर पीठासीन अधिकारी या सदस्य को समिति से हटाया जाएगा: गोपनीयता की धारा 16 का उल्लंघन; किसी अपराध में दोषसिद्धि, या किसी अपराध की जांच लंबित होना; किसी अनुशासनिक कार्यवाही में दोषी पाया जाना, या ऐसी कार्यवाही लंबित होना; या पद का ऐसा दुरुपयोग जिससे पद पर बने रहना सार्वजनिक हित के विरुद्ध हो। खाली पद, या कोई भी आकस्मिक रिक्ति, इसी धारा के अनुसार नए नामांकन से भरी जाती है।
कर्मचारियों की संख्या। धारा 4(1) में कोई न्यूनतम संख्या नहीं है; यह “every employer of a workplace” पर लागू होती है। 10 की संख्या धारा 6(1) से आती है: जहां 10 से कम कर्मचारी होने के कारण आंतरिक समिति नहीं बनी है, वहां की शिकायतें ज़िला अधिकारी की स्थानीय समिति (Local Committee) लेती है।
यहां इस्तेमाल हुए शब्दों की परिभाषाएं हमारी POSH शब्दावली (English) में हैं।
धारा 4 के तहत आपको क्या करना है?
- आंतरिक समिति बनाने का लिखित आदेश जारी करें (धारा 4(1))।
- अलग-अलग जगहों पर स्थित हर कार्यालय या प्रशासनिक इकाई में समिति बनाएं (धारा 4(1) का परंतुक)।
- वरिष्ठ स्तर पर नियुक्त एक महिला कर्मचारी को पीठासीन अधिकारी नामित करें (धारा 4(2)(a))।
- कम से कम दो कर्मचारी सदस्य नामित करें (धारा 4(2)(b))।
- एक बाहरी सदस्य नामित करें, और नियम 3 का भत्ता दें (धारा 4(2)(c) और 4(4))।
- जांच लें कि नामित सदस्यों में से कम से कम आधी महिलाएं हैं (धारा 4(2) का परंतुक)।
- हर सदस्य के नामांकन की तारीख और नियोक्ता द्वारा तय कार्यकाल (अधिकतम तीन वर्ष) दर्ज करें, और वह कार्यकाल पूरा होने से पहले समिति का नवीनीकरण करें (धारा 4(3))।
- धारा 4(5) का कोई आधार सामने आए, तो उस सदस्य को हटाएं और नए नामांकन से पद भरें।
- आदेश कार्यस्थल पर लगाएं, और समिति के सभी सदस्यों के नाम और संपर्क विवरण घोषित करें (धारा 19(b), नियम 13(e))।
धारा 4 कौन सी संख्याएं तय करती है?
| समितियां | अलग-अलग जगह पर स्थित हर कार्यालय या इकाई में 1धारा 4(1) का परंतुक |
|---|---|
| सबसे छोटी समिति | 4 लोग: 1 पीठासीन अधिकारी, 2 कर्मचारी, 1 बाहरी सदस्यधारा 4(2)(a) से (c) से निकलता है |
| कर्मचारी सदस्य | कम से कम 2धारा 4(2)(b) |
| बाहरी सदस्य | 1धारा 4(2)(c) |
| महिलाएं | नामित सदस्यों में से कम से कम आधीधारा 4(2) का परंतुक |
| कार्यकाल | नामांकन से अधिकतम 3 वर्षधारा 4(3) |
| बाहरी सदस्य का भत्ता | प्रतिदिन ₹200; यात्रा: थ्री टायर एसी रेल या एसी बस और ऑटो-रिक्शा या टैक्सी का किराया, या वास्तविक खर्च, जो कम होनियम 3(1) |
| हटाने के आधार | 4धारा 4(5)(a) से (d) |
| धारा 4(1) में न्यूनतम कर्मचारी संख्या | कोई नहीं; 10 से कम कर्मचारियों पर स्थानीय समिति की बात धारा 6(1) में हैधारा 4(1), धारा 6(1) |
| समिति न बनाने पर जुर्माना | ₹50,000 तकधारा 26(1)(a) |
| समिति को शिकायत | घटना (या आख़िरी घटना) के 3 महीने के भीतर; समिति लिखित में दर्ज कारणों से यह समय-सीमा 3 महीने तक और बढ़ा सकती हैधारा 9(1) |
| समिति की जांच | 90 दिन के भीतरधारा 11(4) |
| जांच रिपोर्ट | जांच पूरी होने के 10 दिन के भीतरधारा 13(1) |
| नियोक्ता की कार्रवाई | सिफ़ारिश पर 60 दिन के भीतरधारा 13(4) |
आंतरिक समिति के बारे में अदालतों ने क्या कहा है?
Vishaka & Ors. v. State of Rajasthan & Ors., सर्वोच्च न्यायालय (फैसला 13 अगस्त 1997)
सर्वोच्च न्यायालय के दिशानिर्देशों ने पहली बार समिति का ढांचा तय किया: “The Complaints Committee should be headed by a woman and not less than half of its member should be women.” यानी समिति की प्रमुख एक महिला हों और कम से कम आधे सदस्य महिलाएं हों। दिशानिर्देशों ने एक तीसरे पक्ष की भी बात की, “either NGO or other body who is familiar with the issue of sexual harassment”। धारा 4 इन दोनों बातों को कानून में लाती है। (13 अगस्त 1997 का फैसला ↗)
सर्वोच्च न्यायालय, सिविल अपील संख्या 2482/2014 (फैसला 12 मई 2023)
पैरा 77(i) में न्यायालय ने केंद्र, सभी राज्य सरकारों और केंद्र शासित प्रदेशों को समय-सीमा में यह जांचने का निर्देश दिया कि सरकारी मंत्रालयों, विभागों, संस्थाओं और सार्वजनिक उपक्रमों ने समितियां बनाई हैं, और उनकी संरचना “strictly in terms of the provisions of the PoSH Act” है। पैरा 77(ii) में निर्देश है कि समिति के गठन और संरचना की जानकारी, नामित व्यक्तियों की ई-मेल आईडी और संपर्क नंबर, ऑनलाइन शिकायत की प्रक्रिया, और संबंधित नियम व आंतरिक नीतियां संस्था की वेबसाइट पर उपलब्ध हों और समय-समय पर अपडेट हों। पैरा 77(iii) में यही काम पेशेवरों की वैधानिक संस्थाओं, विश्वविद्यालयों, कॉलेजों, शिक्षण संस्थानों और सरकारी व निजी अस्पतालों और नर्सिंग होम से करने को कहा गया। (12 मई 2023 का फैसला ↗)
सर्वोच्च न्यायालय, कार्यवाही का रिकॉर्ड, 13 अगस्त 2024 (MA Diary No. 22553/2023, सिविल अपील संख्या 2482/2014 में)
इस सुनवाई के रिकॉर्ड में न्याय-मित्र (Amicus Curiae) का यह कथन दर्ज है: “In some cases, the IC is headed by a male member, which is impermissible under the provisions of the PoSH Act and Rules.” यानी कुछ मामलों में समिति का प्रमुख पुरुष है, जो अधिनियम और नियमों के तहत अनुमत नहीं है। (13 अगस्त 2024 का रिकॉर्ड, LiveLaw पर प्रति ↗)
धारा 4 के बारे में नियोक्ता क्या पूछते हैं?
मनस् धारा 4 की समिति कैसे बनाता है?
हम हर कार्यालय के लिए समिति का आदेश और नियुक्ति पत्र तैयार करते हैं, संरचना को धारा 4 से मिलाते हैं, और हर सदस्य के कार्यकाल पर नज़र रखते हैं। डॉ. प्रिया दुबे शर्मा, संस्थापक एवं परामर्श मनोवैज्ञानिक (Founder & Consulting Psychologist), हमारे ग्राहकों की समितियों में बाहरी सदस्य के रूप में काम करती हैं। यह कैसे होता है, यह हमारे POSH अनुपालन पेज पर देखें, या 2 मिनट की मुफ़्त समिति जांच करें। और जवाबों के लिए POSH FAQ पढ़ें।
यह पेज किन स्रोतों पर आधारित है?
- POSH अधिनियम, 2013: India Code पर आधिकारिक PDF (अधिनियम संख्या 14, वर्ष 2013) ↗
- POSH नियम, 2013: भारत का राजपत्र, G.S.R. 769(E) / सा.का.नि. 769(अ), 9 दिसंबर 2013 (सरकारी S3WaaS साइट पर स्कैन; हिंदी पाठ PDF पृष्ठ 15 से 17, अंग्रेज़ी पाठ PDF पृष्ठ 18 से 20) ↗
- Vishaka & Ors. v. State of Rajasthan & Ors., सर्वोच्च न्यायालय, 13 अगस्त 1997 (Indian Kanoon) ↗
- सर्वोच्च न्यायालय, सिविल अपील संख्या 2482/2014, फैसला 12 मई 2023 (Indian Kanoon) ↗
- सर्वोच्च न्यायालय, कार्यवाही का रिकॉर्ड, MA Diary No. 22553/2023, सिविल अपील संख्या 2482/2014 में, 13 अगस्त 2024 (LiveLaw पर प्रति) ↗
इन स्रोतों से अंतिम बार मिलान को किया गया। अधिनियम का पाठ हमारी टिप्पणी के साथ पुनः प्रस्तुत है (Copyright Act, 1957, s.52(1)(q)(ii)); राजपत्र में छपे नियम और अदालती फैसले s.52(1)(q)(i) और (iv) के तहत। यह सामान्य जानकारी है, कानूनी सलाह नहीं। मनस् कोई विधि फर्म नहीं है।
पुस्तकालय में और पढ़ें:
- POSH अधिनियम, 2013, धारा-दर-धारा सरल हिंदी में (हिंदी हब)
- धारा 21: समिति की वार्षिक रिपोर्ट (हिंदी)
- धारा 22: नियोक्ता की वार्षिक रिपोर्ट (हिंदी)
- POSH नियम, 2013, नियम 14: वार्षिक रिपोर्ट (हिंदी)
- Section 4: Internal Committee (English)
- POSH glossary (English)
- POSH Internal Committee FAQ (English)
- POSH हिंदी में
क्या आप अपनी समिति पर दूसरी नज़र चाहते हैं?
मुफ़्त जांच करें, या मनु अनिरुद्ध शर्मा से बात करें, जो मनस् में POSH संबंधी पूछताछ संभालते हैं।
मनु अनिरुद्ध शर्मा · +91 95843 22224 · manu@manas365.com
अंतिम अद्यतन 29 अक्टूबर 2026 · पूरे भारत में ऑनलाइन और भोपाल स्थित हमारे सेंटर में सेवा · Manas Center for Mental Wellness and Counselling, Shop No. 1, HIG 379, H Sector, Ayodhya Nagar, Bhopal, Madhya Pradesh 462041
